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यह संसार तलवार का नहीं बल्कि दृढ़ संकल्प का है। मानव अपने संकल्प के द्वारा संसार को जिस तरह का बनाना चाहता है वह ही बनता है। हर एक के लिए जीवन में एक नया मोड़ लाती है। हर एक को बदलने से नए परिवर्तन का प्रारम्भ होता है। प्रकृति में भी परिवर्तन होता है .जैसे-पुष्प कितने खूबसूरत होते हैं लेकिन वे भी गिरते हैं लेकिन कन्टे अभिमान से अपने सिर ऊंचे हो रहे हैं। इस प्रकार फूलों की सुंदरता भी कांटो के कारण समय के गीत में विलीन हो जाते हैं। यह भाव है कि मनुष्य को फूलों की तरह सुन्दर और क्षणभंगुर नहीं बनना कंटो की तरह सिर उठाकर सम्मान से जीना करना चाहिए।


भारतीय वैज्ञानिक सांप की तरह दिखने वाले एक रोबोट का विकास करना, आपदा और दुर्घटना में न सिर्फ लोगों की जान बचा सकती है, बल्कि निगरानी में सहायक साबित हो सकता है.भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईटीआई), ‘मैकेनिकल और एरोस्पेसइंजिनियरिंग के हैदराबाद ‘के वैज्ञानिक ने तलाशी और बचाव अभियान के लिए स्नेक रोबोट के दों नमूने को डिजाइन किया है। विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और आनुसचरकार ‘आर.प्रशांत कुमार’ ने कहा, ‘भूकम्प के दौरान मकान गिरने, किसी भवन में आग लगने या नाभिकीय संयंत्र मे दुर्घटना जैसी विपदाओं के दौरान स्नेक रोबोट का प्रयोग मुश्किल स्थानों में पहुंचने के लिए और मलबले जिद्दबाचे लोगों की तलाश के लिए किया जा हो सकता है कुमार के अनुसार, ‘यह हालात के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं, जिसका आधार बचाव दल अपनी मिशन की योजना बना सकता है। अग्निरोधक एबीएस प्लास्टिक से बना यह रोबोटिक सांप रेंगाता है और ऊबड़-खाबड़ इलाके में भी काम करने में मदद कर सकते हैं जब स्नेक रोबोट को किसी भी प्रकार की तलाशी अभियान में लगाया जाता है तो यह एक दूसरे से सम्पर्क स्थापित हो सकता है। इसके अलावा, यह रोबोट मलबे में जीवित बचे लोगों को छू सकता है और उनकी पहचान हो सकती है। यह परियोजना संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के ‘इनोवेशन हब के लिए साइबर भौतिक सिस्टम्स’ का हिस्सा है। इस रोबोट का निर्माण जब स्थानीय स्तर पर किया जाता है तो इसकी कीमत लगभग बीस हजार रुपये के आसपास होगा।

1500 मकड़ियो के साथ रहती है यह महिला 

जिन मकड़ियों को देखकर ज्यादातर लोगों को डर लगता है, उन मकड़ियों को यहां के एक महिला ने अपने घर में पाल रखा है वह भी किसी एक नहीं दो नहीं, बल्कि 1500 जहरीली टैरंटुला मकड़ीयां! मिंग कु ना के इस महिला का यह लगाव कुछ साल पहले टैरंटुला को बगीचे में पहली बार देखे जाने पर शुरू किया गया था। उन्होंने उनको अपनी तस्वीर ली और उसे पनाह दिया फिर उसे ऑनलाइन बेच दिया इसके बाद उन्होंने उनको टैरंटुला को इकट्ठा करना शुरू किया। टैरेंटुला के प्रति उनकी लगाव और बढ़ा और उन्होंने इन मकड़ियों को घर पर जगह दी ये मकड़ीयां कई बार उन्हें डंक भी मार डाला है लेकिन वह इन्हें घर से नहीं हटाना चाहता है वह अपने रखरखाव पर खर्च किया गया है 35 लाख रुपये इस अनोखें जुनून के लिए लोगों ने उन्हें ‘टैरेंटुला रानी’ नाम दिया है

लड़की उपेक्षित क्यों

क्या हुआ?

 “लड़की हुई है। अरे! यह तो बुरा हुआ।” अकसर जब लड़की का जन्म होता है तो सब घरवाले यही बात करते हैं। लेकिन वह यह नहीं जानता कि आज लड़की हर काम में लड़कों से आग लगा रही है। पहले जमाना था कि लड़की को घर पर कैदी की तरह रखा था लेकिन अब आज की युवा पीढ़ी जाग उठे है। आज का विज्ञान क्षेत्र में लड़की का बहुत योगदान है ा

परिवार या पूर्ण का पूरा समाज लड़कियों को ही सीमेट दया दया क्यों दिखाना चाहता है जब कि लड़कों को नहीं? घरवालों का खानदान का नाम रोशन करने के लिए लड़के का हाथ माना जाता है, तो कुल की कमान नष्ट करने के नाम पर सिर्फ लड़की को ही क्यों जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? शादी से पहले लड़की अपने माँ-बाप, भाई-बहन के नियंत्रण में रहती हैं शादी के बाद पति और सास-ससुरु और ननद-देवर इत्यादी की बूढ़ापें में पुत्रों और बहनों के बीच में पढ़ता है, ऐसा क्यों? यह ठीक है कि हमारे संस्कार में यह कहते हैं कि लड़की को मौत की सीमाओं का पालन करना चाहिए पर एक सीमा तक। इतना नहीं कि उनकी व्यक्तित्व दब जाए। क्या यह सब नारी जाति के लिए ठीक रहेगा? 

लड़की यदि तरक्की या अगाग बढ़ती अवसर चाहती है तो उसे मना किया जाता है क्या लड़की कों सिर्फ एक कैदी की ही ज़िन्दगी जीने का हक है घर में सभी माता पिता घर के अधिकांश कामों में बेटे से सलाह मशविरा करना है लेकिन बेटी को पराजय समझकर उनकी अवहेलना करना क्या बेटी होना पाप है यदि बेटी की गलती होती है तो भी माँ-बाप या घर के अन्य सदस्य ताने मार मार और सचेत करते हैं। उसको दुखों का कोई सीमा नहीं रहती है उसे उसका स्थान दें अपनापन के लिए तरसती बेटी को आपका प्यार उसे जीना सिखालाएगा ा

 आखिर बेटी यानी नारी को इतनी कथित क्यों समझा जाता है बेटी घर और समाज का एक साथ है आज बेटा घर का चिराग हो तो बेटी भी किसी घर की रोशनी है हर क्षेत्र मे नारी पुरुष के साथ कंधा मिलाकर चल रहा है, लेकिन आज भी परंपराओं से जुड़े लोग बेटी को मनहूस कहते हैं और मानते हैं। वैसें तो के रूप देवी दुर्गा का भी है। जो यहीं अपने पर आ जाए तो हाथ मे खपपर लेकर काली भी बन जाता है। आज माँ बाप की जिम्मेदारी बेटों की बजाय बेटियां अच्छी तरह उठाती है जब घर में बेटे का जन्म हुआ तो सभी लोग पूले नहीं समाते और जब लड़की का जन्म होता है तो उनके मुंह से आह निकलें जाते हैं। आखिर क्यों? आइये इस विचारधारा को बदलने के लिए!

Vishvistariye taapman badne se oxizen ki mantra ghati


Vishvistariye tapen (globle warming) ki vajhe se prithvi per oxizen ki matra ghat sakti hain. Ek Naye adhyayan se prapt niskarso ke aadhar per vigyanik dwara logo ko chetavni di gayi hain ki samundar ke tapman me kuch digri ki braddhi hone se prithvi per maujood oxizen ki matra me bhi kami aa sakti hain. Britain ki university of Leicester me karyrt kuch shodkartaon ke mtanusaar, globle warming ki baje se oxizen ki matra me aane wali kami prithvi ke nivasion ke liye bhut Adhik ghatak sabit hogi. Yeh sankat us aapda  se adhik ghatak hoga jo bhayankar baad dwara paida ki jaati hain. In shodhkartaon dwara apne adhyayan ke aadhar per bataya gya hain ki vesvik samundar ke tapman me lugbug 6digri Celsius ki braddhi son2100 tuk ho sakti hain. Isse oxizen ka utserjn band ho sakta hain. University of Leicester me ganit vibhag ke professor S. Peretovuski ke mtanusar oxizen ke khatm hone se globle warming ke Karan antarktika ki barf pighalne se vesvic baad aa sakti hain. 

Siyachin glesior 

Jis jaghy thoothpaset rude me hi jum jaaye aur Santra save jese fal thand me jumker patther jese kade ho jaaye aur baat karte samay aavaz aispast ho jaaye, to samjha ja sakta hain ki siyachin me saeniko ko kitni muskilo ka samna Karna padta hoga.  

Yhan samasya sirf himskhlan ki hi nhi hain, balki atyaadhik unchaai aur oxizen ki kami v hva ke kam sghn hone ke Karan Manushy ka sarir thik se kaam nhi ker pasta hain, log Asani se bimar pad jaate hain. 

Pichle saal Feb. Ke mahine me jab uttar Bharat me thand apne charam per thi, Desh ke uttar chor per isthit Siyachin Glesior me ek hadsa hua. Whan 19,600 fut ki unchai per 3 Feb. Ko barfhili chattane khisakne se bhari himskhlan hua jiski chpet me sonam post namak Bharatiye chonki aa gai. Is choki per muddras regiment ke ek junior adgikari aur 9 sainik tainat the. Ghatna ka pata chalne ke turant bad thalsena aur vaiusena ne apni rahat teem Ghana istal per bheji. Leh se snow kter jese upkaran bhi bheje gaye hain. Thand ke in Dino me Siyachin ka tapman adhiktum-25°C aur nuntum -45°C rehta hain. Whan kiye gaye bachav karya ke wabjud 9 sainiko ko mrt nikala ja saka, lekin bhuskhlen ke 6 din bad 1 sainik jivit Mila. Yeh sainik lugbug 6,000m ki unchai per Siyachin Glesior me kai miter barf ke biter dbe the, jub bchav-karmion NE unhe jivit nikala to unka jivit milna ek chamatkar mana gaya qunki barf me itne din tak jinda rehna lugbug asambhav hain. Unhe ilaaj ke liye Dilli ke sainik ashpatal me bharti karaya gaya, lekin be koma se bahar na aa ske aur anttah unka nidan ho gaya.  In paristithiyo me siyachin me rehna v whan Kary Karna apne aap me ek udh jesa hota hain,lekin humari Sena ki bhartiye simaon ki raksha ke liye whan tainati zaruri hain. 

 Ek waqt tha,  jub siyachin sirf romanch ke liye Jana jata tha 70 aur 80 ke dashak me siyachin me sirf parvartarohi hi jaate the, us samay Pakistan me karakoram aur siyachin chetra me desi-videsi parvertarohi ko jaane ki izazat de rakhi thi. 


Udaas rehne se paida ho sakta hain hrady rog 

Lumbe samay tak udaasi ko nazarandaaz Karna kisi bhi vyakti ke liye kaafi ghatak saabit ho sakta hain. Esse mansik rog ka khatra to rehta hi hain saath me aur koi any prakar ki samasiyain bhi shuru ho jaati hain. Udaasi ka sambandh hamare hrady se bhi hain. Britain ke OXFORD visvh-vidhyaale me karyrut professor msur hussain NE vichaar vyakt kiye hain ki lambe samay tak rehne Wali udaasi ka kaaran adhi tak thik thik pata nhi chal paya hain. Parantu mystic me hone Wale parivartno ki vajhe se yeh istthi paida ho sakti hain. Mystic ke prifretel kontreks me hone Wale parivartan iske liye zimmedaar hote hain. Professor msur ke matanusaar mystic ke is bhag se manav me samvedenatmk pratikriyain sanchaarit hoti hain. uske prabhabit hone se manav me kai parivaran aate hain. Udaas rehne me iski bhumika mehetvpurn hain. Hrady rog se pidiht bujurg logo me yeh samasya bhut adhik paai jaati hain. Umer badne ke saath hi frentel kortex me Rakt ki aapurti kam hone lagti hain, qnki hrady ki rakt dhaminiya patili ho jaati hain. Iske kaaran mystic per iska prabhab padta hain.  

Manav Sharir : kuch mehetvpurn jankariya

  1. Sabse badi huddi – fimer, jo jangh me payi jati hain. 
  2. sabse choti huddi – esterus, jo madhya kaan me Paai jati hain. Jo teen huddiyon se sabse bhitri huddi hain aur iski lumbai maatr 2.6mm se 36mm tuk hoti hain. 
  3. Laal rakt koshikaon ka jivan kaal – 100 se 200 din 
  4. Swet rakt koshikaon ka jivan kaal – 2 se 5 din 
  5. Purushon me hrdey ka bhaar – lugbhug 350gm
  6. Mahilaon ke hrdey ka bhaar – lugbhug 250gm
  7. Samanya hrdey gati – istriyon me 74 se 82 baar prati min. Aur purshon me 70 se 72 pati min. 
  8. 1 min. Me pump kiya gaya rakt – 5 liter
  9. Sarvdata rakt samhu – ‘O’ samhu 
  10. Saragrahi samhu – ‘AB’ samhu
  11. Shvsan der prati min. – 16 se 20 baar
  12. Ek sansh me Khichi gai huwa – 500ml g
  13. Sharir ki sabse badi granthi – ykrat
  14. Sharir ki sabse badi maaspeshi – glutiyas meximus
  15. sabse badi sheera – enfhiyer benaa kewaa 
  16. Sabse badi dhmini – ebdominul Aorta
  17. Aamashya khali hone me lugne wala samay – 25 ghante 
  18. Rukt ka PH – 7.35
  19. Mutr ka PH –6.00
  20. Sabse badi tantrika  – shiyaatic
  21. Sharir me bhaar ka lugbhug – 65%jal hota hain. 


Insaan ki aas bekaar

अलविदा हो हिन्द से इंसान जन्नत को गये ,

मखलूक की इमदाद करने तीन बेटे रह गयेाा

सबसे बड़े रिश्वत अली मझले सिफारिश खान, 

छोटे खुशामद बेग हैं जिनकी निकाली शान हैंाा

कत्ल के जुर्म मे भी रिश्वत अली की जीत, 

सख्त हाकिम मोम बन गाता उसी के गीत हैंाा

नौकरी मिलना कठिन हो तो जा मिल सिफारिश खान से ा

योग्यता हो नोरमल तो कर हुकूमत शान सेाा

मुन्ना खुशामद बेग को गोदी में ले पुचकार कर,

जी हुजरी सीख ले चाह फिर जो व्यापार कराा

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